बिहार चुनाव: रजौली (एससी) सीट पर कांटे की टक्कर

बिहार चुनाव: रजौली (एससी) सीट पर कांटे की टक्कर, विमल राजवंशी 1,500 वोटों से आगे; अंतिम 12 राउंड पर टिकी निगाहें

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नवादा/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की मतगणना में रजौली (अनुसूचित जाति सुरक्षित) सीट पर इस समय बेहद रोमांचक और करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवार विमल राजवंशी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार पिंकी भारती पर महज 1,500 वोटों की मामूली बढ़त बना ली है। अब तक 17 राउंड की मतगणना पूरी हो चुकी है, जबकि जीत-हार का फैसला करने वाले निर्णायक 12 राउंड की गिनती बाकी है, जिससे तनाव चरम पर है।

वर्तमान स्थिति और वोटों का गणित

मतगणना केंद्र से मिल रहे ताजा रुझानों के अनुसार, लोजपा (रामविलास) के विमल राजवंशी ने एक निर्णायक मोड़ पर 1,500 मतों की बढ़त हासिल कर ली है। यह बढ़त इतनी कम है कि हर अगला राउंड इस मुकाबले की दिशा को पूरी तरह से बदल सकता है। राजद की उम्मीदवार पिंकी भारती लगातार उन्हें कड़ी टक्कर दे रही हैं और महज 1,500 वोटों के फासले से पीछे चल रही हैं। यह आंकड़ा स्पष्ट संकेत देता है कि यह सीट दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है और अंतिम क्षणों तक इसका नतीजा स्पष्ट नहीं होगा।

इस त्रिकोणीय मुकाबले में जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार नरेश चौधरी इन दोनों मुख्य दावेदारों से बहुत पीछे छूट गए हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, चौधरी 52,642 वोटों के बड़े अंतर से पिछड़ रहे हैं, जिससे साफ है कि मुकाबला अब केवल लोजपा (रामविलास) और राजद के बीच ही सिमट गया है।

रजौली सीट का राजनीतिक महत्व

रजौली विधानसभा क्षेत्र, जो नवादा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण आरक्षित सीट मानी जाती है। 2020 के पिछले चुनाव में यह सीट राजद के खाते में गई थी, जब प्रकाश वीर ने जीत हासिल की थी। ऐसे में, राजद के लिए पिंकी भारती के माध्यम से इस सीट को बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती है, खासकर तब जब चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) ने एक मजबूत दलित-केंद्रित आधार बनाकर इस सीट पर कड़ी सेंध लगाई है।

इस बार लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार विमल राजवंशी के लिए यह बढ़त चिराग पासवान के नेतृत्व में पार्टी के बढ़ते जनाधार का प्रमाण है। 59 वर्षीय राजवंशी एक अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 2.2 करोड़ रुपये है। दूसरी ओर, राजद की युवा उम्मीदवार पिंकी भारती, जिनकी शैक्षिक योग्यता 12वीं पास है, अपने दल के मजबूत आधार पर भरोसा करते हुए इस मुकाबले को अंतिम दौर तक ले जा रही हैं।

अंतिम 12 राउंड निर्णायक

मतगणना के 17 राउंड पूरे होने के बाद, अब सभी की निगाहें बचे हुए 12 राउंड पर टिकी हैं। चूंकि बढ़त का अंतर केवल 1,500 वोटों का है, इसलिए अगले कुछ राउंड में यह आसानी से पलट सकता है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि इतनी करीबी लड़ाई में, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बचे हुए वोटों की गणना, साथ ही किसी विशेष पोलिंग बूथ से वोटों का अचानक झुकाव, पूरे परिणाम को निर्धारित करेगा।

सामान्यतः, प्रत्येक राउंड में लगभग 1,500 से 2,000 वोटों की गिनती होती है। यदि लोजपा उम्मीदवार अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो यह चिराग पासवान के लिए बड़ी जीत होगी। वहीं, अगर राजद अंतिम क्षणों में बाजी पलटने में कामयाब होती है, तो यह तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए एक मनोवैज्ञानिक जीत होगी। नवादा जिले के इस क्षेत्र में जहां विकास और रोजगार मुख्य चुनावी मुद्दे थे, मतदाताओं का यह बंटा हुआ जनादेश दोनों ही गठबंधनों के लिए गहन आत्म-विश्लेषण का विषय है।

अंतिम परिणाम घोषित होने तक रजौली सीट पर राजनीतिक दलों और समर्थकों के बीच सस्पेंस बना रहेगा। आधिकारिक तौर पर परिणाम की घोषणा सभी 29 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद ही की जाएगी। मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि अंतिम परिणाम आने तक शांति और पारदर्शिता बनी रहे।

निष्कर्ष:

रजौली (एससी) सीट पर विमल राजवंशी की मामूली बढ़त ने इस चुनाव को बिहार के सबसे कड़े मुकाबलों में से एक बना दिया है। यह 1,500 वोटों का अंतर, और बचे हुए 12 राउंड की गिनती, यह सुनिश्चित करती है कि यह लड़ाई अंतिम वोट गिने जाने तक जारी रहेगी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यह मुकाबला न केवल उम्मीदवारों, बल्कि लोजपा (रामविलास) और राजद के बीच राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की जंग को भी दर्शाता है।

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