बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने बोर्ड परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। नकल और कदाचार जैसी पुरानी चुनौतियों से निपटने तथा परीक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतारने के उद्देश्य से बोर्ड ने राज्य के नौ प्रमंडलों में कुल 10 अत्याधुनिक हाईटेक परीक्षा केंद्र स्थापित किए हैं। इन परीक्षा केंद्रों में एक साथ 11,392 परीक्षार्थी बैठकर परीक्षा दे सकते हैं।
बोर्ड ने इन केंद्रों को ‘आदर्श परीक्षा केंद्र’ का दर्जा देते हुए इन्हें पूरी तरह से तकनीक आधारित और सुरक्षित बनाया है। अब बिहार बोर्ड की परीक्षाएं न केवल पारंपरिक पेपर बेस्ड टेस्ट (PBT) बल्कि कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा (CBT) के रूप में भी आयोजित हो सकेंगी।
नौ प्रमंडलों में हाईटेक परीक्षा केंद्र
इन परीक्षा केंद्रों को राज्य के नौ प्रमुख प्रमंडलों में विकसित किया गया है। इनमें राजधानी पटना के साथ-साथ गया, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, मुंगेर, सहरसा, छपरा और पूर्णिया शामिल हैं।
- बापू परीक्षा परिसर – 2980 सीट
- आदर्श परीक्षा केंद्र – 1168 सीट
- गया – 1168 सीट
- दरभंगा – 1168 सीट
- मुजफ्फरपुर – 1168 सीट
- भागलपुर – 1168 सीट
- मुंगेर – 620 सीट
- सहरसा – 620 सीट
- छपरा – 692 सीट
- पूर्णिया – 640 सीट
इन सभी केंद्रों को मिलाकर कुल 11,392 छात्रों की परीक्षा क्षमता तैयार की गई है।
सबसे बड़ा परीक्षा केंद्र – पटना का बापू परीक्षा परिसर
इन सभी में सबसे बड़ा केंद्र पटना स्थित बापू परीक्षा परिसर है। यहां 2980 परीक्षार्थी एक साथ बैठकर परीक्षा दे सकते हैं। यह परिसर पहले भी कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय महत्वपूर्ण परीक्षाओं का सफल आयोजन कर चुका है।
इसके अलावा, पटना में ही एक और आदर्श परीक्षा केंद्र है, जहां 1168 छात्रों के बैठने की व्यवस्था की गई है। राजधानी में दो बड़े परीक्षा केंद्र होने के कारण पटना प्रमंडल छात्रों और प्रशासन दोनों के लिए सुविधाजनक साबित होगा।
पारदर्शिता पर जोर
बिहार बोर्ड ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव किए हैं। कॉपियों का डिजिटली मूल्यांकन, रिजल्ट जारी करने की समयबद्धता और तकनीकी साधनों के उपयोग से बोर्ड ने छात्रों के बीच विश्वास कायम किया है। अब इन नए हाईटेक परीक्षा केंद्रों से उम्मीद की जा रही है कि नकल और कदाचार की समस्याएं लगभग समाप्त हो जाएंगी।
परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक उपस्थिति, कंप्यूटराइज्ड डेटा प्रबंधन और सख्त सुरक्षा मानकों के कारण यहां नकल करना लगभग असंभव होगा।
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप
बोर्ड का कहना है कि ये सभी परीक्षा केंद्र अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। यहां बिजली, इंटरनेट, वातानुकूलन, सुरक्षित नेटवर्क और अत्याधुनिक उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
इतना ही नहीं, परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त पार्किंग, साफ-सफाई, पेयजल और हेल्पडेस्क की व्यवस्था की गई है। इससे छात्रों को परीक्षा के दौरान तनावमुक्त माहौल मिलेगा।
नकलमुक्त परीक्षा की ओर कदम
बिहार की परीक्षा प्रणाली को लेकर लंबे समय तक नकल और कदाचार की खबरें सुर्खियों में रही हैं। कई बार तो पूरे-पूरे परीक्षा केंद्र रद्द करने तक की नौबत आई। लेकिन अब बोर्ड का मानना है कि इन हाईटेक केंद्रों की वजह से परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह नकलमुक्त हो जाएगी।
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“हमारा लक्ष्य सिर्फ परीक्षा कराना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। इन केंद्रों के माध्यम से बिहार बोर्ड देश में एक मिसाल पेश करेगा।”
छात्रों और अभिभावकों का विश्वास
इन बदलावों से छात्रों और अभिभावकों में उत्साह है। पटना के एक अभ्यर्थी ने कहा कि अब उन्हें भरोसा है कि मेहनत से प्राप्त अंक ही रिजल्ट में दिखाई देंगे। पहले जहां नकल और धांधली की खबरों से असुरक्षा बनी रहती थी, अब हाईटेक केंद्रों की वजह से उम्मीद है कि सब निष्पक्ष होगा।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार बोर्ड का यह कदम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए मॉडल साबित हो सकता है। डिजिटल परीक्षा केंद्रों से नकल की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी। साथ ही, कंप्यूटर आधारित परीक्षा से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी तैयारी का अनुभव मिलेगा।
आगे की योजना
सूत्रों के अनुसार, बोर्ड भविष्य में और भी हाईटेक केंद्र बनाने की योजना पर काम कर रहा है। लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में पूरे राज्य में परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए।
निष्कर्ष
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का यह कदम शिक्षा सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। एक ओर जहां इससे परीक्षा प्रक्रिया नकलमुक्त और पारदर्शी बनेगी, वहीं दूसरी ओर छात्र-छात्राओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
कुल 11,392 सीटों वाले इन 10 अत्याधुनिक परीक्षा केंद्रों से यह संदेश स्पष्ट है कि बिहार बोर्ड अब पारंपरिक कमजोरियों से निकलकर तकनीकी मजबूती की ओर अग्रसर है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल बिहार की शिक्षा प्रणाली की छवि सुधारेगी, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
