शिक्षा विभाग के आदेशों की धज्जियां: छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूली, विरोध करने पर शिक्षक ने पीटा, पाँच शिक्षक दोषी पाए गए

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नवादा जिले के मेसकौर प्रखण्ड स्थित केशोराम इंटर विद्यालय, बीजुबिघा में गुरुवार को एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि इंटरमीडिएट एवं मैट्रिक के छात्रों से फॉर्म भरने के नाम पर शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही थी। जब कुछ छात्रों ने इस अतिरिक्त वसूली का विरोध किया, तो कथित रूप से विद्यालय के शिक्षक शिवमणि ने विद्यार्थियों के साथ मारपीट की। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। हालांकि इस वायरल वीडियो की पुष्टि हमारे समाचार पत्र ने स्वतंत्र रूप से नहीं की है।

विरोध से प्रशासन तक पहुँची बात

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय समाजसेवी डॉ. अभय कुशवाहा और आदर्श युवा क्लब के सदस्यों ने मामले को शिक्षा विभाग के उच्च पदाधिकारियों तक पहुँचाया। शुक्रवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को लिखित रूप से सूचित कर जाँच की माँग की गई।

बीईओ ने की प्रत्यक्ष जांच

शुक्रवार को बीईओ ने विद्यालय परिसर पहुँचकर मामले की प्रत्यक्ष जाँच की। इस दौरान छात्रों, अभिभावकों और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए गए। जाँच में यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय के पाँच शिक्षकों और एक लिपिक द्वारा छात्रों से तय शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही थी।

जाँच रिपोर्ट में जिन शिक्षकों एवं कर्मचारियों के नाम सामने आए, वे हैं –

  1. शिवमणि (शिक्षक)
  2. मुकेश कुमार (शिक्षक)
  3. सोनू कुमार (शिक्षक)
  4. शिवम कुमार (शिक्षक)
  5. छोटेलाल साव (किरानी/लिपिक)

अधिक वसूली गई राशि लौटाई गई

जाँच में दोष सिद्ध होने के बाद बीईओ ने सख्त रुख अपनाया। छात्रों से वसूली गई अतिरिक्त राशि को तत्काल वापस करने का निर्देश दिया गया। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक सरोज कुमार नायक ने कैमरे के सामने छात्रों को उनकी अतिरिक्त जमा की गई राशि वापस की।

शिक्षक पर छात्रों से मारपीट का आरोप

सबसे गंभीर आरोप शिक्षक शिवमणि पर लगा है, जिन्होंने विरोध करने वाले छात्रों को कथित रूप से पीटा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शिक्षक का अत्यंत अमर्यादित और निंदनीय व्यवहार है। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में ऐसी घटनाएँ पूरे समाज के लिए चिंता का विषय हैं।

धरना-प्रदर्शन हुआ स्थगित

घटना के विरोध में गुरुवार शाम से ही छात्र और अभिभावक विद्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए थे। छात्रों ने दोषी शिक्षकों की बर्खास्तगी की माँग की। जब बीईओ ने आश्वासन दिया कि पाँचों दोषी शिक्षकों एवं कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई कर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की जाएगी, तब जाकर धरना समाप्त किया गया।

समाजसेवी और युवा क्लब की भूमिका

डॉ. अभय कुशवाहा और आदर्श युवा क्लब की सक्रियता इस पूरे प्रकरण में अहम रही। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय समाजसेवी और युवा क्लब आगे नहीं आते, तो मामला दबा दिया जाता और छात्रों के साथ अन्याय होता। डॉ. कुशवाहा ने कहा कि “शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। गरीब छात्रों से जबरन पैसे वसूलना एक प्रकार का शोषण है। इस मामले को उच्च स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।”

प्रशासन की सख्ती

बीईओ ने आश्वासन दिया है कि दोषी शिक्षकों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को संपूर्ण रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोषी पाए गए शिक्षकों और कर्मचारी को सेवा से हटाने तक की कार्रवाई संभव है।

छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश

घटना के बाद से छात्रों और अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग हर वर्ष समय-समय पर फॉर्म भरने, परीक्षा शुल्क और अन्य फीस को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी करता है। इसके बावजूद विद्यालयों में छात्रों को प्रताड़ित कर उनसे मनमाने तरीके से पैसे वसूले जाते हैं। अभिभावकों का आरोप है कि यह भ्रष्टाचार का एक सुनियोजित तरीका है, जिसमें विद्यालय प्रशासन और कर्मचारी शामिल रहते हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल

यह मामला केवल शुल्क वसूली तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। शिक्षक समय पर कक्षाओं में नहीं आते और छात्रों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। ऐसे में जबरन पैसे वसूलने की घटना ने शिक्षा प्रणाली की खामियों को और उजागर कर दिया है।

सरकार से अपेक्षा

छात्रों और समाजसेवियों ने मांग की है कि दोषी शिक्षकों को कड़ी सजा दी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएँ। साथ ही विद्यालयों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि शिक्षा विभाग के आदेशों का पालन हो और छात्र शांति से अपनी पढ़ाई कर सकें।

निष्कर्ष

मेसकौर प्रखंड के केशोराम इंटर विद्यालय, बिजुबिधा में हुई यह घटना शिक्षा व्यवस्था की खामियों और मनमानी का जीता-जागता उदाहरण है। यदि समाजसेवी और युवा क्लब आगे न आते तो छात्रों की आवाज शायद दब जाती। शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र में इस प्रकार की घटनाएँ न केवल छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हैं बल्कि पूरे समाज को गलत संदेश देती हैं। अब सबकी निगाहें शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि दोषी शिक्षकों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या वास्तव में छात्रों को न्याय मिल पाता है।

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