PM Kisan Samman Nidhi :- देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) योजना की 21वीं किस्त का इंतजार जल्द खत्म हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार दिवाली 2025 से पहले यह किस्त किसानों के खातों में ट्रांसफर कर सकती है। कृषि मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि विभाग ने सभी राज्यों से लाभार्थियों की ई-केवाईसी और सत्यापन प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि धनराशि समय पर जारी की जा सके।
इससे पहले, पीएम किसान योजना की 20वीं किस्त अगस्त 2025 में जारी की गई थी, जिसके तहत 8.5 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला था। सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी थी। हर बार की तरह इस बार भी सरकार का लक्ष्य है कि लाभार्थियों तक रकम बिना किसी देरी के पहुंचे।
हिमाचल, पंजाब और उत्तराखंड के किसानों को पहले ही मिली राहत
इस बीच, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 26 सितंबर 2025 को बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित राज्यों — हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड — के किसानों के लिए राहत राशि जारी की थी। इन राज्यों के किसानों को पीएम किसान निधि की राशि पहले ही उनके खातों में जमा कर दी गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने उस अवसर पर कहा था कि “केंद्र सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ खड़ी है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
इस विशेष वितरण से यह स्पष्ट होता है कि सरकार समय पर किसानों तक मदद पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अगली किस्त कब आएगी?
जानकारी के अनुसार, 21वीं किस्त अक्टूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर के पहले सप्ताह तक जारी की जा सकती है। चूंकि इस अवधि में ही दिवाली का त्यौहार आता है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि सरकार किसानों को त्योहार से पहले आर्थिक राहत देने का निर्णय ले सकती है।
वित्त और कृषि मंत्रालय के संयुक्त समन्वय से किस्त जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कई राज्य सरकारों ने लाभार्थियों के आंकड़ों का सत्यापन पूरा कर लिया है। हालांकि, जिन किसानों की ई-केवाईसी लंबित है, उन्हें जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है, ताकि उनका नाम इस किस्त में शामिल किया जा सके।
क्या है पीएम किसान योजना?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना फरवरी 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहयोग प्रदान करना है ताकि वे अपने खेती-बाड़ी के खर्चों को पूरा कर सकें और फसल के मौसम के बीच अपनी आजीविका को स्थिर रख सकें।
इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। अब तक इस योजना के माध्यम से किसानों के खातों में 2.8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की जा चुकी है।
ई-केवाईसी अनिवार्य: बिना इसके नहीं मिलेगा लाभ
पीएम किसान योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। सरकार ने इसे इसलिए लागू किया ताकि लाभ सही पात्र किसानों तक पहुंचे और किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना न रहे।
किसान PM Kisan पोर्टल पर जाकर ओटीपी आधारित ई-केवाईसी कर सकते हैं। वहीं, जिन किसानों के पास ऑनलाइन सुविधा नहीं है, वे अपने निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी करवा सकते हैं।
सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए PM-Kisan मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया था, जो 24 फरवरी 2020 को शुरू हुआ।
फेस ऑथेंटिकेशन फीचर से हुआ और आसान सत्यापन
साल 2023 में सरकार ने इस ऐप में एक महत्वपूर्ण फीचर जोड़ा — फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication)। इस सुविधा के माध्यम से दूरदराज के इलाकों में रहने वाले किसान बिना ओटीपी या फिंगरप्रिंट के, केवल अपने चेहरे को स्कैन करके ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
यह फीचर उन किसानों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जिनके पास सीमित डिजिटल साधन हैं या जिन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर है। इसके अलावा, ऐप में स्व-पंजीकरण (self-registration), लाभ स्थिति ट्रैकिंग (benefit status tracking), और चेहरे की पहचान आधारित ई-केवाईसी जैसी सुविधाएँ भी शामिल हैं।
कृषि मंत्रालय का कहना है कि “फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक ने दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों के लिए डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। इससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हुई है।”
किसानों के लिए क्या जरूरी है अब?
जो किसान आगामी 21वीं किस्त का लाभ पाना चाहते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी ई-केवाईसी पूरी हो, बैंक खाता आधार से लिंक हो, और भूमि रिकॉर्ड अपडेट हों। यदि इनमें से कोई भी प्रक्रिया अधूरी रह गई, तो किसान इस किस्त से वंचित रह सकते हैं।
केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे ग्राम स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को ई-केवाईसी पूर्ण करने के लिए प्रेरित करें।
